केदारनाथ : प्रेम और प्रलय

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अभिषेक कपूर निर्देशित केदारनाथ, जो सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान की डेब्यु फिल्म है, रिलीज हो चुकी है। हिंदू और मुस्लिम युवक की प्रेम कहानी और प्रलय पर आधारित केदारनाथ की शुरूआत खूबसूरत और धार्मिक स्थल केदारनाथ से होती है।

घूमता हुआ कैमरा दृश्य को खूबसूरत बना देता है और कुछ ही पलों बाद केदारनाथ में श्रद्धालुओं को अपनी पीठ पर या अपने घोड़े पर लादकर केदारनाथ की यात्रा करवाने वाले मंसूर का प्रवेश होता है।

मंसूर हंसमुख, चंचल स्वभाव और मस्तमौला युवक है। मंसूर की इस अदा पर हिंदू श्रद्धालु और मंदिर के पुजारी तक फिदा हैं। इस बीच मंसूर की मुलाकात पंडित की बेटी मुक्कु से होती है। मुक्कु को मंसूर पसंद आ जाता है। मुक्कु मौज मस्ती करते करते मंसूर से प्यार का इजहार कर देती है। लेकिन, मुक्कु की सगाई एक अन्य हिंदू युवक से हुई होती है, जिसको मुक्कु पसंद नहीं करती क्योंकि पहले उस युवक की शादी मुक्कु की बड़ी बहन से होने वाली होती है।

मुक्कु और मंसूर के बीच पक रही इश्क खिचड़ी की महक मुक्कु की बहन तक पहुंच जाती है और वह मंसूर को धमकाने और नसीहत देने पहुंच जाती है। इसके बाद मंसूर मुक्कु से दूर होने का प्रयास करता है।

मुक्कु अपने प्रेम की परीक्षा देकर मंसूर को फिर से अपने पास आने के लिए मजबूर कर देती है। लेकिन, इस रिश्ते के बारे में मुक्कु के पिता और मंगेतर को पता चल जाता है। मुक्कु की शादी रख दी जाती है। शादी के दिन मुक्कु अपनी नस काट लेती है और उधर, केदारनाथ में प्रलय आ जाती है। आगे की कहानी के लिए केदारनाथ पटल दर्शन कीजिये।

अभिषेक कपूर निर्देशित केदारनाथ नाहीं तो लीक से हटकर है और नाहीं, यह हिंदी सिने जगत में बनने वाली प्रेम कहानी फिल्मों से अलग है। अभिषेक कपूर और कनिका ढिल्लों ने केदारनाथ की त्रासदी को भुनाने की कोशिश की है। प्रलय की त्रासदी को रचने में कनिका ढिल्लों और अभिषेक कपूर असफल रहे हैं। हालांकि, प्रेम कहानी कहीं न कहीं यथारथ में करीब दिखी।

कहानी को बांधने रखने के लिए नोक झाोक, भावनात्मक सीनों और चुटीले संवादों का बेहतर तरीके से इस्तेमाल हुआ है। फिल्म का संपादन बेहतर है और कहानी तेज गति से दौड़ती है। तेज दौड़ती फिल्म थोड़ी सी सतही लगने लगती है। प्रलय की त्रासदी और अन्य समस्याओं पर गहनता से बात न होने कारण केदारनाथ एक सामान्य हिंदी प्रेम कथा फिल्म बनकर रह जाती है।

सुशांतसिंह राजपूत और सारा अली खान अपने अपने किरदारों में जंचते हैं। लेकिन, सारा अली खान कुछ सीनों में गजब ढहती हैं। रूप रंग अमृता सिंह से मिलता जुलता होने के कारण सारा अली खान का चेहरा अनजान सा नहीं लगता है।

फिल्म केदारनाथ का गीत संगीत ठीक ठाक है। सिनेमेटोग्राफी बेहतरीन है। बैकग्राउंड म्यूजिक और त्रासदी के सीनों का फिल्मांन भी बेहतरीन है।

यदि आप फिल्म को मनोरंजन के लिए देखते हैं तो केदारनाथ आपके लिए अच्छी और मनोरंजक फिल्म साबित हो सकती है। यदि आप अभिषेक कपूर की केदारनाथ में कुछ नयापन मिलने की उम्मीद लेकर सिनेमा हॉल जा रहे हैं तो निराशा हाथ लग सकती है क्योंकि यह फिल्म किसी गहन शोध पर आधारित नहीं।


कुलवंत हैप्पी 

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