अलविदा! शशि की शीतलता और आभा से सरोबार थी शशि कपूर की शख्सियत

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नियति का खेल देखिये! साल 2017 की दूसरी तिमाही में फिल्म जगत ने अभिनेता विनोद खन्ना के रूप में मायानगरी के खूबसूरत चेहरे को भीगी आंखों से अलविदा कहा था और इसी साल के अंतिम महीने में हिंदी सिने जगत को भरे मन से शशि की शीलता और आभा से सरोबार शख्सियत शशि कपूर को अलविदा कहना पड़ रहा है।

4 दिसंबर 2017 को अभिनेता शशि कपूर ने मुम्बई के कोकिलाबेन अस्पताल में अंतिम सांस ली। हालांकि, कपूर खानदान का यह निराला चिराग अपने उम्दा काम की बदौलत हमेशा सिने प्रेमियों के दिल की चौखट पर दीप्तिमान रहेगा।

शशि का अर्थ चांद होता है और शशि कपूर के स्वभाव में चांद की ठंडक और मुस्कराते हुए चेहरे से चांद की चमक झरती थी। सफलता के दौर में अभिनेता शशि कपूर ने फिल्म निर्माण में कदम रखा। पर, समय के पाबंद शशि कपूर ने सेट पर कभी भी किसी के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया।

बुरे वक्त में भी चेहरे की मुस्कान का साइज कम नहीं होने देते थे। 1960 के दशक के अंत में शशि कपूर के पास अधिक काम नहीं था। शशि कपूर को अपनी स्पोर्ट्स कार बेचनी पड़ी और उनकी प​त्नी ने भी अपनी चीजों को बेचना शुरू कर दिया। लेकिन, फिल्म शर्मिली की सफलता ने शशि कपूर के पेशे की डगमगाती नाव को संभाला ही नहीं, बल्कि चौंकाने वाली रफ्तार दी।

इस समय अभिनेता शशि कपूर फिल्म जगत के सबसे ज्यादा महंगे सितारों की सूची में देव आनंद के साथ दूसरे पायदान पर आए और 1975 के बाद 1982 तक विनोद खन्ना के साथ सबसे महंगे अभिनेता के रूप में शशि कपूर तीसरे पायदान पर रहे।

सफलता का स्वाद चखने वाले शशि कपूर ने बुरे वक्त का कड़वा स्वाद भी चखा है। शादी से पहले जेनिफर केंडल और शशि कपूर सिंगापुर में ​थे, उनको मलेशिया शो करने के लिए जाना था। अचानक शो कैंसिल हो गए। दोनों बुरी तरह टूट गए। ऐसे वक्त में राज कपूर ने उनको मुम्बई वापस आने के लिए टिकट मुहैया करवाए और दोनों की शादी करवायी।

कपूर खानदान से आने वाले शशि कपूर ने फिल्म जगत में प्रवेश करने का फैसला अपनी शादी के बाद लिया। उससे पहले शशि कपूर रंगमंच से जुड़े हुए थे। इस रंगमंच की वजह से शशि कपूर की मुलाकात जेनिफर केंडल से हुई थी।

पहली संतान होने के बाद शशि कपूर ने चारदीवारी और धर्मपुत्र साइन की। धर्मपुत्र में अभिनेता शशि कपूर लीड अभिनेता के रूप में बड़े पर्दे पर दिखे। लेकिन, शशि कपूर के साथ इस फिल्म में कोई भी अभिनेत्री काम करने के लिए तैयार न थी। अंत, अभिनेत्री नंदा ने शशि कपूर के साथ काम करने के लिए हां कही।

शशि कपूर को बेस्ट ​अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार फिल्म न्यू दिल्ली टाइम्स के लिए मिला था। दिलचस्प बात तो यह है कि इस फिल्म को शशि कपूर ने​ बिना पटकथा पढ़े झटपट साइन कर लिया था। इस फिल्म के लिए केवल एक हजार एक रुपये साइनिंग अमाउंट ली थी। शशि कपूर का स्वभाव देखकर निर्देशक हक्का बक्का रह गया था। इस फिल्म का निर्देशन ​नवोदित फिल्मकार रमेश शर्मा ने किया था।

जुनून और कलयुग के लिए बातौर निर्माता दो नेशनल फिल्म अवार्ड हासिल करने वाले शशि कपूर को साल 2011 में पद्म भूषण और 2015 में दादा साहब फालके अवार्ड से सम्मानित किया गया।

शशि कपूर की पत्नी जेनिफर केंडल का देहांत 1984 में हुआ। कहा जाता है कि शशि कपूर ने पत्नी जेनिफर केंडल के देहांत के बाद खुद की सेहत पर अधिक ध्यान देना बंद कर दिया। हालांकि, जेनिफर केंडल के रहते हुए शशि कपूर खुद को फिट रखने के लिए हरसंभव प्रयास करते थे।

कुलवंत हैप्पी

Image Source : Twitter User  

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