फिल्म पोस्टर बाॅयज हंसते हंसाते कहती है नसबंदी जैसी गंभीर बात

पिछले शुक्रवार फिल्मकार आरएस प्रसन्ना फिल्म शुभ मंगल सावधान में मर्दाना कमजोरी का मुद्दा लेकर आए थे, तो इस शुक्रवार पोस्टर बाॅयज में फिल्मकार व अभिनेता श्रेयस तलपदे नसबंदी पर बात कर रहे हैं।

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फिल्म पोस्टर बाॅयज की कहानी तीन ऐसे व्यक्तियों के इर्दगिर्द घूमती है, जिन्होंने नसबंदी नहीं करवायी, लेकिन, उनकी फोटो नसबंदी प्रचार के पोस्टर पर लग जाती है, जिसके कारण उनके निजी जीवन में भूचाल आ जाता है क्योंकि नसबंदी को लेकर उनके गांव में लोग जागरूक नहीं हैं और इसको गांव वाले कलंक व शर्मिंदगी के रूप में देखते हैं।

जगावर चैधरी ”सन्नी देओल” की बहन की सगाई टूट जाती है, अर्जुन सिंह ”श्रेयस तलपदे” की प्रेम कहानी में भी ट्विस्ट आ जाता है और विनय शर्मा ”बाॅबी देओल” का बसा बसाया घर उजड़ने की कगार पर आकर खड़ा हो जाता है।

इन समस्याओं से पार पाने के लिए तीनों को काफी जद्दोजहद करना पड़ता है, जो पर्दे पर अभिनेता से निर्देशक बने श्रेयस तलपदे ने काफी खूबसूरत के साथ पेश किया है।

सन्नी देओल ने सेल्फी शौकीन रिटायर्ड फौजी, बाॅबी देओल ने भुल्लकड़ शिक्षक और श्रेयस तलपदे ने रिकवरी एजेंट की भूमिका को बाखूबी निभाया है। फिल्म के दूसरे सहयोगी कलाकारों ने भी अपने अपने किरदारों को बड़ी ईमानदारी से अदा किया है।

फिल्म पोस्टर बाॅयज का स्क्रीन प्ले काफी शानदार और उम्दा लिखा गया है, जो शुरू से लेकर फिल्म खत्म होने तक फिल्म को मनोरंजक बनाए रखता है। फिल्म की लेखन टीम ने सराहनीय कार्य किया है। फिल्म के संवाद काफी चुटीले हैं। फिल्म की कहानी में गीत संगीत के लिए जगह नहीं है। शुरूआत में एक गाना कुड़ियां शहर दीयां डाला गया है, जो फिल्म की खूबसूरती को और निखारता है।

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने पोस्टर बाॅयज को यूए प्रमाण पत्र दिया। एकदम सही है क्योंकि इस फिल्म में अश्लील जैसी कोई बात नहीं है। हालांकि, फिल्म में कुछ संवाद दोअर्थी हैं, जो चुभते नहीं क्योंकि विषय के अनुरूप उनका होना अनिवार्य भी लगता है।

पोस्टर बाॅयज एक मनोरंजक काॅमेडी फिल्म है, जो आपको गुदगुदाने के पूरे अवसर देती है। अगर इस फिल्म की रेटिंग की बात की जाए तो यह फिल्म साढ़े तीन स्टार की हकदार है।
– कुलवंत हैप्पी