जब हैरी मेट सेजल – अभिनय की शतकीय पारी पर लच्‍चर पटकथा ने फेरा पानी

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यूरोपियन एयरपोर्ट से एक गुजराती परिवार को अलविदा कहते हुए हरविंदर सिंह नेहरा उर्फ हैरी, जो एक टूरिस्‍ट गार्इड है, बहुत खुश है। लेकिन, उसकी खुशी ज्‍यादा देर नहीं टिकती, क्‍योंकि उस परिवार की एक सदस्‍य सेजल वापस हैरी के पास आ जाती है और उसको रिंग खोजने में मदद के लिए कहती है।

हैरी सेजल के साथ जाना नहीं चाहता, पर, नौकरी बचाने के लिए हैरी को सेजल का साथ देना पड़ता है। हैरी और सेजल दोनों उन उन जगहों पर जाते हैं, जहां जहां रिंग मिलने की संभावना होती है। इस बीच सेजल और हैरी को एक दूसरे प्‍यार होने लगता है।

सेजल हैरी के प्‍यार में बुरी तरह फंस जाती है, और हैरी भी। लेकिन, इस बीच सेजल की रिंग मिलती है और सेजल शादी के लिए भारत रवाना हो जाती है। क्‍या सेजल और हैरी एक दूसरे के बिन रह पाएंगे या सेजल हैरी से शादी करेगी? जानने के लिए जब हैरी मेट सेजल देखनी होगी।

फिल्‍म में शाह रुख खान और अनुष्‍का शर्मा का अभिनय सराहनीय है। दोनों ही सितारे अपने अपने किरदारों में रमे हुए नजर आए। दोनों ने सलामी बल्‍लेबाजों की तरह अंत तक शकतीय पारी खेली है। अफसोस, उनकी शतकीय पारी का फायदा फिल्‍म निर्देशक इम्‍तियाज अली बिलकुल नहीं उठा सके।

फिल्‍म ‘जब हैरी मेट सेजल’ उस रेस्‍टोरेंट जैसी है, जिसकी भव्‍यता तो आकर्षित करती है, लेकिन, उसका खाना स्‍वादहीन है। फिल्‍म में गीत संगीत, स्‍टार कास्‍ट और बेहतरीन सिनेमेटोग्राफी है, लेकिन, फिल्‍म वाली कैची फीलिंग नहीं है। पटकथा काफी लच्‍चर तरीके से लिखी गई है। कहानी को हैरी और सेजल पर केंद्रित करके पूरी तरह मार दिया।

इम्‍तियाज अली शुरूआत अच्‍छे तरीके से करते हैं, लेकिन, बाद में दर्शकों को मूर्ख बनाने में कोशिश कसर बाकी नहीं छोड़ते, जैसे अनुष्‍का शर्मा का शाह रुख खान की गर्लफ्रेंड बनना, गुंडों द्वारा बंदी बनाए शाह रुख खान का गुंडों से पूछना आपके असली दस्‍तावेज हैं? और सेजल का शादी वाले स्‍थल पर बैठकर हैरी का इंतजार करना।

आपके मन में कुछ सवाल कौंद सकते हैं, जैसे कि क्‍यों शाह रुख खान उदास रहते हैं? क्‍यों सेजल हैरी के साथ सब कुछ करने को तैयार हो जाती है, जबकि वो सगाईशुदा लड़की है, और उसको तो रिंग खोने जैसी बात पर भी शर्मिंदगी महसूस होती है?

इस फिल्‍म को देखने और समझने के बाद ऐसा कहीं नहीं लगता कि फिल्‍म जब हैरी मेट सेजल दर्शकों को प्रभावित कर पाएगी। यह फिल्‍म केवल दो स्‍टार की हकदार है, वो भी शानदार अभिनय, सिनेमेटोग्राफी और गीत संगीत के कारण।

कुलवंत हैप्‍पी

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